Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.320.123: हे राजन! ये अवस्थाएँ प्रत्येक अवस्था में लुप्त होती और उत्पन्न होती रहती हैं, परन्तु दिखाई नहीं देतीं; जैसे दीपक की लौ प्रतिक्षण लुप्त होती और उत्पन्न होती रहती है, परन्तु दिखाई नहीं देतीं॥123॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  12.320.123 
न चैषामत्ययो राजन् लक्ष्यते प्रभवो न च।
अवस्थायामवस्थायां दीपस्येवार्चिषो गति:॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ये अवस्थाएँ प्रत्येक अवस्था में लुप्त होती और उत्पन्न होती रहती हैं, परन्तु दिखाई नहीं देतीं; जैसे दीपक की लौ प्रतिक्षण लुप्त होती और उत्पन्न होती रहती है, परन्तु दिखाई नहीं देतीं॥123॥
 
O King! In every stage these phases keep on fading and coming into existence, but they are not visible; just like the flame of a lamp keeps on fading and coming into existence every moment, but they are not visible.॥ 123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)