श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  12.320.117 
बिन्दुन्यासादयोऽवस्था: शुक्रशोणितसम्भवा:।
यासामेव निपातेन कललं नाम जायते॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
जीवों में वीर्य निर्माण से लेकर रजोदर्शन और मैथुन तक कुछ निश्चित अवस्थाएँ होती हैं जिनके संयोग से 'कलाल' नामक पदार्थ उत्पन्न होता है ॥117॥
 
There are certain stages in living beings ranging from semen formation to menarche and sexual intercourse, due to the combination of which a substance called 'Kalal' is produced. 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)