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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना
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श्लोक 108
श्लोक
12.320.108
प्रकृतिर्व्यक्तिरित्येतौ गुणौ यस्मिन् समाश्रितौ॥ १०८॥
अनुवाद
जिसमें दो गुण (प्रकृति (माया)) और पुरुष (प्रकाश) आश्रित हैं (अब तक अठारह हैं)।॥108॥
In which the two qualities (Prakriti (Maya)) and the person (light) are dependent (till now there are eighteen).॥ 108॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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