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mahabharat 12.320.105: उस बारहवें गुण वाली बुद्धिमें सत्त्व नामक (तेरहवाँ) गुण है, जिससे महासत्त्व और अल्पसत्त्व प्राणियोंका अनुमान किया जाता है ॥105॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  12.320.105 
अथ द्वादशके तस्मिन् सत्त्वं नामापरो गुण:।
महासत्त्वोऽल्पसत्त्वो वा जन्तुर्येनानुमीयते॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
उस बारहवें गुण वाली बुद्धिमें सत्त्व नामक (तेरहवाँ) गुण है, जिससे महासत्त्व और अल्पसत्त्व प्राणियोंका अनुमान किया जाता है ॥105॥
 
In that twelfth quality intellect, there is a (thirteenth) quality called Sattva, from which Mahasattva and Alpasattva beings are estimated. 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)