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mahabharat 12.320.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "हे कुरुवंश के राजा, ऋषि-रमणी! मुझे बताएं कि किसने गृहस्थ जीवन का त्याग किए बिना मोक्ष की स्थिति प्राप्त की है, जहां बुद्धि विलीन हो जाती है?"   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.320.1 
युधिष्ठिर उवाच
अपरित्यज्य गार्हस्थ्यं कुरुराजर्षिसत्तम।
क: प्राप्तो विनयं बुद्धॺा मोक्षतत्त्वं वदस्व मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे कुरुवंश के राजा, ऋषि-रमणी! मुझे बताएं कि किसने गृहस्थ जीवन का त्याग किए बिना मोक्ष की स्थिति प्राप्त की है, जहां बुद्धि विलीन हो जाती है?"
 
Yudhishthira asked, "O King of the Kuru clan, Rishi-Ramni! Tell me who has attained the state of salvation, where the intellect is dissolved, without renouncing the life of a householder?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)