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mahabharat 12.32.8-9: हे पाण्डुपुत्र! तुमने धर्म का नाश करने वाले लोगों को उनके सेवकों सहित मार डाला है। तुम अपने धर्म में दृढ़ रहते हुए भी शोक क्यों कर रहे हो? क्योंकि राजा का कर्तव्य है कि वह धर्मद्रोही का वध करे, सत्पात्रों को दान दे और धर्मानुसार प्रजा की रक्षा करे।   |   mahabharat अध्याय 12.32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  12.32.8-9 
ते त्वया धर्महन्तारो निहता: सपदानुगा:॥ ८॥
स्वधर्मे वर्तमानस्त्वं किं नु शोचसि पाण्डव।
राजा हि हन्याद् दद्याच्च प्रजा रक्षेच्च धर्मत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! तुमने धर्म का नाश करने वाले लोगों को उनके सेवकों सहित मार डाला है। तुम अपने धर्म में दृढ़ रहते हुए भी शोक क्यों कर रहे हो? क्योंकि राजा का कर्तव्य है कि वह धर्मद्रोही का वध करे, सत्पात्रों को दान दे और धर्मानुसार प्रजा की रक्षा करे।
 
O son of Pandu! You have killed those people along with their servants who were destroying Dharma. Why are you mourning even though you are steadfast in your Dharma? Because it is the duty of the king to kill those who are traitors to Dharma, give alms to the deserving and protect the subjects according to Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)