Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.32.6-7h: जो मनुष्य मोहवश होकर प्रामाणिक धर्म और उसके व्याख्या करने वाले शास्त्रों का तिरस्कार करता है, चाहे वह दास हो, पुत्र हो, तपस्वी हो या कोई और हो; ऐसे पापियों का हर प्रकार से दमन या नाश कर देना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रमाणमप्रमाणं य: कुर्यान्मोहवशं गत:।
भृत्यो वा यदि वा पुत्रस्तपस्वी वाथ कश्चन॥ ६॥
पापान् सर्वैरुपायैस्तान् नियच्छेच्छातयीत वा।
अनुवाद
जो मनुष्य मोहवश होकर प्रामाणिक धर्म और उसके व्याख्या करने वाले शास्त्रों का तिरस्कार करता है, चाहे वह दास हो, पुत्र हो, तपस्वी हो या कोई और हो; ऐसे पापियों का हर प्रकार से दमन या नाश कर देना चाहिए।
One who, under the influence of delusion, rejects the authentic Dharma and the scriptures that explain it, be he a servant or a son, an ascetic or anyone else; such sinners should be suppressed or destroyed by all means. 6 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥