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mahabharat 12.32.4: भरतश्रेष्ठ! वह सनातन तप ही ब्राह्मणों का प्रतिष्ठित धर्म है। क्षत्रिय ही सम्पूर्ण ब्राह्मण धर्म की रक्षा करता है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.32.4 
तत् प्रमाणं ब्राह्मणानां शाश्वतं भरतर्षभ।
तस्य धर्मस्य कृत्स्नस्य क्षत्रिय: परिरक्षिता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वह सनातन तप ही ब्राह्मणों का प्रतिष्ठित धर्म है। क्षत्रिय ही सम्पूर्ण ब्राह्मण धर्म की रक्षा करता है। 4॥
 
Bharatshrestha! That eternal penance is the established religion for Brahmins. Kshatriya is the one who protects the entire Brahmin religion. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)