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स्वधर्मे वर्तमानस्य सापवादेऽपि भारत।
एवमात्मपरित्यागस्तव राजन् न शोभन:॥ २३॥
अनुवाद
हे राजन! हे भरतपुत्र! यदि किसी का धर्म दोषपूर्ण भी हो, तो भी उसमें दृढ़ रहने वाले आप जैसे धर्मात्मा राजा के लिए शरीर त्यागना उचित नहीं है।
O King! O son of Bharata! Even if one's Dharma is flawed, it is not appropriate for a righteous king like you, who remains steadfast in it, to give up his body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥