Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.32.18: राजा! ईश्वर के विधान का कहीं भी कोई उल्लंघन नहीं कर सकता। अतः दण्ड या शस्त्र द्वारा किये गए पाप किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकते (क्योंकि वे ईश्वर के आश्रित होकर ही दण्ड या शस्त्र द्वारा मारे गए हैं)। | mahabharat अध्याय 12.32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि कश्चित् क्वचिद् राजन् दिष्टं प्रतिनिवर्तते।
दण्डशस्त्रकृतं पापं पुरुषे तन्न विद्यते॥ १८॥
अनुवाद
राजा! ईश्वर के विधान का कहीं भी कोई उल्लंघन नहीं कर सकता। अतः दण्ड या शस्त्र द्वारा किये गए पाप किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकते (क्योंकि वे ईश्वर के आश्रित होकर ही दण्ड या शस्त्र द्वारा मारे गए हैं)।
King! No one can violate the law of God anywhere. Therefore, the sins committed by punishment or weapons cannot apply to any person (because they have been killed by punishment or weapons only by being dependent on God).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥