Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.32.17: (2) यदि तुम कहते हो कि पुण्य और पाप कर्मों का कर्ता वही है जो उन्हें करता है, कोई दूसरा (ईश्वर) नहीं, तो ऐसा मानने पर भी तुमने पुण्य कर्म किया है; क्योंकि तुमने केवल पापियों और उनके समर्थकों को ही मारा है; इसके अतिरिक्त उन्हें अपने प्रारब्ध का फल इसी रूप में मिला है; तुम तो निमित्त मात्र हो। | mahabharat अध्याय 12.32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(2) यदि तुम कहते हो कि पुण्य और पाप कर्मों का कर्ता वही है जो उन्हें करता है, कोई दूसरा (ईश्वर) नहीं, तो ऐसा मानने पर भी तुमने पुण्य कर्म किया है; क्योंकि तुमने केवल पापियों और उनके समर्थकों को ही मारा है; इसके अतिरिक्त उन्हें अपने प्रारब्ध का फल इसी रूप में मिला है; तुम तो निमित्त मात्र हो।
(2) If you say that the doer of pious and sinful deeds is the person who does them and no one else (God), then even if you believe so, you have still done a good deed; because you have killed only the sinners and their supporters; apart from this, they have received the result of their destiny in this form; you are merely an instrument.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥