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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीका अनेक युक्तियोंसे राजा युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.32.11 
मया त्ववध्या बहवो घातिता राज्यकारणात्।
तानि कर्माणि मे ब्रह्मन् दहन्ति च पचन्ति च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे ब्रह्म! इस राज्य के लिए मैंने अनेक अजेय पुरुषों का वध किया है। मेरे यही कर्म मुझे जलाकर जला रहे हैं। 11.
 
But, O Brahman! For the sake of this kingdom, I have killed many invincible men. These very deeds of mine burn and bake me. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)