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mahabharat 12.319.7: दिन, रात और महीनों के चक्र को कोई नहीं रोक सकता। इसी प्रकार जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था का चक्र भी चलता रहता है। जिस नश्वर मनुष्य का जीवन अनिश्चित है, वह कभी-कभी बहुत समय के बाद शाश्वत मार्ग (मोक्ष मार्ग) की शरण लेता है।   |   mahabharat अध्याय 12.319: जरा-मृत्युका उल्लंघन करनेके विषयमें पञ्चशिख और राजा जनकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.319.7 
न ह्यहानि निवर्तन्ते न मासा न पुन: क्षपा:।
सोऽयं प्रपद्यतेऽध्वानं चिराय ध्रुवमध्रुव:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दिन, रात और महीनों के चक्र को कोई नहीं रोक सकता। इसी प्रकार जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था का चक्र भी चलता रहता है। जिस नश्वर मनुष्य का जीवन अनिश्चित है, वह कभी-कभी बहुत समय के बाद शाश्वत मार्ग (मोक्ष मार्ग) की शरण लेता है।
 
The cycles of days, nights and months cannot be stopped by anyone. Similarly, the cycles of birth, death and old age keep going on. The mortal human whose life is uncertain, sometimes, after a long time, takes refuge in the eternal path (path of salvation).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)