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mahabharat 12.319.5: हे प्रभु! किस आचरण, तप, बुद्धि, कर्म या शास्त्रज्ञान से मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता है?’ 5॥   |   mahabharat अध्याय 12.319: जरा-मृत्युका उल्लंघन करनेके विषयमें पञ्चशिख और राजा जनकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 319: जरा-मृत्युका उल्लंघन करनेके विषयमें पञ्चशिख और राजा जनकका संवाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.319.5 
केन वृत्तेन भगवन्नतिक्रामेज्जरान्तकौ।
तपसा वाथ बुद्धॺा वा कर्मणा वा श्रुतेन वा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! किस आचरण, तप, बुद्धि, कर्म या शास्त्रज्ञान से मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता है?’ 5॥
 
'Lord! By what conduct, penance, intelligence, action or knowledge of scriptures can a man transcend death?' 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)