अच्छे-बुरे कर्म करने वाले के अतिरिक्त और कौन है जो उन कर्मों के फलस्वरूप स्वर्ग-नरक को देखेगा और भोगेगा? अतः शास्त्रविधि का उल्लंघन न करते हुए सभी को दान-यज्ञ आदि शुभ कर्म करते रहना चाहिए। ॥15॥
Who else other than the one who performs good and bad deeds will see and enjoy heaven and hell as a result of those deeds? Therefore, without disobeying the injunctions of the scriptures, everyone should continue to perform good deeds like charity and sacrifices. ॥15॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पञ्चशिखजनकसंवादे एकोनविंशत्यधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३१९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पंचशिख और जनकका संवादविषयक तीन सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥