श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 319: जरा-मृत्युका उल्लंघन करनेके विषयमें पञ्चशिख और राजा जनकका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.319.15 
द्रष्टा स्वर्गस्य कोऽन्योऽस्ति तथैव नरकस्य च।
आगमांस्त्वनतिक्रम्य दद्याच्चैव यजेत च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अच्छे-बुरे कर्म करने वाले के अतिरिक्त और कौन है जो उन कर्मों के फलस्वरूप स्वर्ग-नरक को देखेगा और भोगेगा? अतः शास्त्रविधि का उल्लंघन न करते हुए सभी को दान-यज्ञ आदि शुभ कर्म करते रहना चाहिए। ॥15॥
 
Who else other than the one who performs good and bad deeds will see and enjoy heaven and hell as a result of those deeds? Therefore, without disobeying the injunctions of the scriptures, everyone should continue to perform good deeds like charity and sacrifices. ॥15॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पञ्चशिखजनकसंवादे एकोनविंशत्यधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३१९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पंचशिख और जनकका संवादविषयक तीन सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)