Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.97: इसके बाद मिथिला के राजा ने विदेह का राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं भी तपस्वी धर्म का पालन करते हुए वहाँ रहने लगे ॥97॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  12.318.97 
विदेहराज्यं च तदा प्रतिष्ठाप्य सुतस्य वै।
यतिधर्ममुपासंश्चाप्यवसन्मिथिलाधिप:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद मिथिला के राजा ने विदेह का राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं भी तपस्वी धर्म का पालन करते हुए वहाँ रहने लगे ॥97॥
 
After this, the ruler of Mithila handed over the kingdom of Videha to his son and he himself started living there following the ascetic religion. ॥97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)