Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.90: ब्राह्मण ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुए, क्षत्रिय ब्रह्मा की भुजाओं से उत्पन्न हुए, वैश्य ब्रह्मा की नाभि से उत्पन्न हुए और शूद्र ब्रह्मा के चरणों से उत्पन्न हुए, अतः सभी जातियों के लोग ब्रह्मा के स्वरूप हैं। किसी भी जाति को ब्रह्मा से भिन्न नहीं समझना चाहिए ॥90॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुए, क्षत्रिय ब्रह्मा की भुजाओं से उत्पन्न हुए, वैश्य ब्रह्मा की नाभि से उत्पन्न हुए और शूद्र ब्रह्मा के चरणों से उत्पन्न हुए, अतः सभी जातियों के लोग ब्रह्मा के स्वरूप हैं। किसी भी जाति को ब्रह्मा से भिन्न नहीं समझना चाहिए ॥90॥
Brahmins were born from the mouth of Brahma, Kshatriyas were born from the arms of Brahma, Vaishyas were born from the navel of Brahma and Shudras were born from the feet of Brahma, hence people of all castes are the form of Brahma. No caste should be considered different from Brahma. ॥90॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥