Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.9: तत्पश्चात् मुझे ताप से जलता हुआ देखकर भगवान सूर्य बोले - 'तात! तुम दो घड़ी तक इस ताप को सहन करो। फिर यह अपने आप शीतल और शांत हो जाएगा।'   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.318.9 
ततो विदह्यमानं मामुवाच भगवान् रवि:।
मुहूर्तं सह्यतां दाहस्तत: शीतीभविष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मुझे ताप से जलता हुआ देखकर भगवान सूर्य बोले - 'तात! तुम दो घड़ी तक इस ताप को सहन करो। फिर यह अपने आप शीतल और शांत हो जाएगा।'
 
After that, seeing me burning with heat, Lord Surya said – ‘Tat! You bear this heat for two hours. Then it will automatically become cool and calm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)