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mahabharat 12.318.80: जब जीवात्मा प्रकृति के संसर्ग से मुक्त होकर ईश्वर को प्राप्त कर लेता है, तब वह सर्वज्ञ विद्वान् हो जाता है और इस संसार में पुनर्जन्म नहीं लेता ॥80॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.318.80 
यदा स केवलीभूत: षड्‍‍‍विंशमनुपश्यति।
तदा स सर्वविद् विद्वान् न पुनर्जन्म विन्दति॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जब जीवात्मा प्रकृति के संसर्ग से मुक्त होकर ईश्वर को प्राप्त कर लेता है, तब वह सर्वज्ञ विद्वान् हो जाता है और इस संसार में पुनर्जन्म नहीं लेता ॥80॥
 
When the living soul, free from the contact of nature, realizes God, then he becomes an omniscient scholar and does not take rebirth in this world. 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)