Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.79: काश्यपनंदन! जन्म-मृत्यु के भय से भयभीत होकर योग और सांख्य के साधकों को भगवान् में ही समर्पित हो जाना चाहिए और शुद्ध भाव से छब्बीसवें तत्व भगवान् का दर्शन करते हुए जीवात्मा और परमात्मा को एक ही जानना चाहिए तथा इस अव्यक्त दर्शन की सदैव स्तुति करनी चाहिए॥79॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काश्यपनंदन! जन्म-मृत्यु के भय से भयभीत होकर योग और सांख्य के साधकों को भगवान् में ही समर्पित हो जाना चाहिए और शुद्ध भाव से छब्बीसवें तत्व भगवान् का दर्शन करते हुए जीवात्मा और परमात्मा को एक ही जानना चाहिए तथा इस अव्यक्त दर्शन की सदैव स्तुति करनी चाहिए॥79॥
Kashyapanandan! Afraid of the fear of birth and death, the devotees of Yoga and Sankhya should be devoted to God and while having darshan of the twenty-sixth element God with pure feelings, they consider the soul and the God as one and always praise this indistinct darshan. 79॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥