Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.68: इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि आप सर्वज्ञ हैं और सम्पूर्ण चराचर जगत् को जानते हैं; अतः मैं आपके मुख से उस तत्त्वज्ञान को सुनना चाहता हूँ जो घी के समान स्वादिष्ट और सारगर्भित है॥ 68॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि आप सर्वज्ञ हैं और सम्पूर्ण चराचर जगत् को जानते हैं; अतः मैं आपके मुख से उस तत्त्वज्ञान को सुनना चाहता हूँ जो घी के समान स्वादिष्ट और सारगर्भित है॥ 68॥
There is no doubt whatsoever that you are all-wise and know the entire animate and inanimate world; therefore, I desire to hear from your mouth the Tattvajnana which is as tasty and substantial as the butter-like ghee.॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥