Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.67: ब्रह्मन्! याज्ञवल्क्य! आपने सम्पूर्ण सांख्य और योगशास्त्र का भी विशेष ज्ञान प्राप्त कर लिया है ॥67॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  12.318.67 
सांख्यज्ञानं त्वया ब्रह्मन्नवाप्तं कृत्स्नमेव च।
तथैव योगशास्त्रं च याज्ञवल्क्य विशेषत:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! याज्ञवल्क्य! आपने सम्पूर्ण सांख्य और योगशास्त्र का भी विशेष ज्ञान प्राप्त कर लिया है ॥67॥
 
Brahman! Yajnavalkya! You have also acquired special knowledge of complete Sankhya and Yogashastra. 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)