श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.318.66 
ब्रह्मलोकगताश्चैव कथयन्ति महर्षय:।
पतिश्च तपतां शश्वदादित्यस्तव भाषिता॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मलोक में गए हुए बड़े-बड़े ऋषिगण भी आपकी महानता का वर्णन करते हैं। तपते हुए तेजोमय ग्रहों के पति, सनातन सूर्य ने आपको वेदों का उपदेश दिया है।
 
Even the great sages who have gone to Brahmaloka describe your greatness. The eternal Sun, the husband of the scorching bright planets, has preached the Vedas to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)