Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.65: ऐसा कोई विषय नहीं है जो आप न जानते हों। आप वैदिक ज्ञान के भंडार माने जाते हैं। हे ब्रह्मन्! आप स्वर्ग और पितरों के लोकों में भी प्रसिद्ध हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.318.65 
न तवाविदितं किंचिद् भवान् श्रुतिनिधि: स्मृत:।
कथ्यते देवलोके च पितृलोके च ब्राह्मण॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कोई विषय नहीं है जो आप न जानते हों। आप वैदिक ज्ञान के भंडार माने जाते हैं। हे ब्रह्मन्! आप स्वर्ग और पितरों के लोकों में भी प्रसिद्ध हैं।
 
There is no subject that you do not know. You are considered to be the repository of Vedic knowledge. O Brahman! You are famous even in the heavens and the worlds of ancestors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)