Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.64: ब्राह्मणदेव! अब मैं इस विषय में आपकी बुद्धि द्वारा किया गया निर्णय सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप विद्वानों में श्रेष्ठ, शास्त्रों के मर्मज्ञ और परम बुद्धिमान हैं॥64॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  12.318.64 
तस्मात् तद् वै भवद्‍बुद्धॺा श्रोतुमिच्छामि ब्राह्मण।
भवान् प्रबर्ह: शास्त्राणां प्रगल्भश्चातिबुद्धिमान्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणदेव! अब मैं इस विषय में आपकी बुद्धि द्वारा किया गया निर्णय सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप विद्वानों में श्रेष्ठ, शास्त्रों के मर्मज्ञ और परम बुद्धिमान हैं॥64॥
 
Brahmindev! Now I want to hear the decision made by your wisdom in this matter; Because you are the best among scholars, a profound scholar of the scriptures and extremely intelligent. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)