Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.62-63: तत्पश्चात् रुद्र, ज्ञानी विश्वरूप, अन्य देवता, पितर और दानवों ने भी विभिन्न स्थानों से इस सम्पूर्ण ज्ञान को प्राप्त किया। वे सभी जानने योग्य सत्य को पूर्ण और शाश्वत बताते हैं। 62-63. | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् रुद्र, ज्ञानी विश्वरूप, अन्य देवता, पितर और दानवों ने भी विभिन्न स्थानों से इस सम्पूर्ण ज्ञान को प्राप्त किया। वे सभी जानने योग्य सत्य को पूर्ण और शाश्वत बताते हैं। 62-63.
Thereafter Rudra, the wise Vishwaroop, other gods, ancestors and demons also acquired this complete knowledge from various places. All of them describe the knowable truth as complete and eternal. 62-63.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥