Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.56: उस आत्मा के विषय में द्वैतवादी धारणा रखने वाले मूर्ख लोग कहते हैं - 'सनातन अव्यक्त परमात्मा दूसरा है और पच्चीसवाँ तत्वात्मा दूसरा है, किन्तु ऋषिगण उन दोनों को एक ही मानते हैं।' | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस आत्मा के विषय में द्वैतवादी धारणा रखने वाले मूर्ख लोग कहते हैं - 'सनातन अव्यक्त परमात्मा दूसरा है और पच्चीसवाँ तत्वात्मा दूसरा है, किन्तु ऋषिगण उन दोनों को एक ही मानते हैं।'
Foolish people, having a dualistic notion regarding that soul, say - 'The eternal unmanifested Supreme Soul is second and the twenty-fifth elemental soul is second, but sages consider both of them to be one.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥