Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.52: इसी प्रकार जो मनुष्य वेदों का अध्ययन करके भी वेद और अवेद्य का सार नहीं जानता, वह केवल ज्ञान का बोझ ढोने वाला मूर्ख माना जाता है ॥52॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा वेद्यमवेद्यं च वेदविद्यो न विन्दति।
स केवलं मूढमतिर्ज्ञानभारवह: स्मृत:॥ ५२॥
अनुवाद
इसी प्रकार जो मनुष्य वेदों का अध्ययन करके भी वेद और अवेद्य का सार नहीं जानता, वह केवल ज्ञान का बोझ ढोने वाला मूर्ख माना जाता है ॥52॥
Similarly, the person who does not know the essence of Vedya and Avedya even after studying the Vedas, is considered a foolish person who only carries the burden of knowledge. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥