Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.49: हे गन्धर्वराज! जो लोग वेदों में कहे गए उस जानने योग्य परब्रह्म को नहीं जानते, जिसमें सब प्राणी निवास करते हैं, जिससे उत्पन्न होते हैं और जिसमें लीन हो जाते हैं, वे परम सत्य से विमुख होकर जन्मते और मरते रहते हैं॥49॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जायन्ते च म्रियन्ते च यस्मिन्नेते यतश्च्युता:।
वेदार्थं ये न जानन्ति वेद्यं गन्धर्वसत्तम॥ ४९॥
अनुवाद
हे गन्धर्वराज! जो लोग वेदों में कहे गए उस जानने योग्य परब्रह्म को नहीं जानते, जिसमें सब प्राणी निवास करते हैं, जिससे उत्पन्न होते हैं और जिसमें लीन हो जाते हैं, वे परम सत्य से विमुख होकर जन्मते और मरते रहते हैं॥49॥
O King of Gandharvas! Those who do not know the knowable Supreme Being, as stated in the Vedas, in whom all beings reside, from whom they are born and in whom they merge, they keep on taking birth and dying, being deviated from the ultimate truth. ॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥