Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.47: गुणों का क्षय होने के कारण प्रकृति नाशवान मानी जाती है और उसी का प्रेरक होने के कारण पुरुष को विद्वान लोग अविनाशी कहते हैं। हे गन्धर्वराज! मैंने तुम्हें मोक्ष प्राप्ति में सहायक यह चौथी आन्विकी विद्या बताई है॥47॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुणों का क्षय होने के कारण प्रकृति नाशवान मानी जाती है और उसी का प्रेरक होने के कारण पुरुष को विद्वान लोग अविनाशी कहते हैं। हे गन्धर्वराज! मैंने तुम्हें मोक्ष प्राप्ति में सहायक यह चौथी आन्विकी विद्या बताई है॥47॥
Due to the decay of qualities, nature is considered to be perishable and because it is its motivator, the man is called imperishable by the learned. O King of Gandharvas! I have told you this fourth Anviksiki Vidya, which is helpful in attaining salvation. ॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥