Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.42: इसी प्रकार अव्यक्त प्रकृति का वर्णन अवेद्य नाम से और मनुष्य का वर्णन वेद्य नाम से किया गया है। तुमने जो जंगम और स्थावर के विषय में प्रश्न किया है, उसका उत्तर सुनो। ॥42॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैवावेद्यमव्यक्तं वेद्य: पुरुष उच्यते।
चलाचलमिति प्रोक्तं त्वया तदपि मे शृणु॥ ४२॥
अनुवाद
इसी प्रकार अव्यक्त प्रकृति का वर्णन अवेद्य नाम से और मनुष्य का वर्णन वेद्य नाम से किया गया है। तुमने जो जंगम और स्थावर के विषय में प्रश्न किया है, उसका उत्तर सुनो। ॥42॥
In the same way, the unmanifested nature is described by the name Avedya and the human being is described by the name Vedy. Listen to the answer to the question you have asked about the movable and the immovable. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥