Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.38: इस प्रकार विश्वा नाम से विख्यात अव्यक्त प्रकृति त्रिगुणात्मक है; क्योंकि वही त्रिगुणात्मक जगत् को जन्म देती है। उसके अतिरिक्त जो आत्मा शुद्ध (कलाओं से रहित) है, उसे अविश्व कहते हैं। इसी प्रकार अश्व और अश्व का जोड़ा भी देखा जाता है (अर्थात् अश्व अव्यक्त प्रकृति है और अश्व मनुष्य है)। | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिगुणं गुणकर्तृत्वादविश्वो निष्कलस्तथा।
अश्वश्चाश्वा च मिथुनमेवमेवानुदृश्यते॥ ३८॥
अनुवाद
इस प्रकार विश्वा नाम से विख्यात अव्यक्त प्रकृति त्रिगुणात्मक है; क्योंकि वही त्रिगुणात्मक जगत् को जन्म देती है। उसके अतिरिक्त जो आत्मा शुद्ध (कलाओं से रहित) है, उसे अविश्व कहते हैं। इसी प्रकार अश्व और अश्व का जोड़ा भी देखा जाता है (अर्थात् अश्व अव्यक्त प्रकृति है और अश्व मनुष्य है)।
In this way, the unmanifested nature known as Vishva is triple in nature; Because she is the one who gives birth to the triple world. Apart from that, the soul which is pure (free from arts) is called Avishwa. Similarly, the pair of horse and horse is also seen (that is, horse is latent nature and horse is man).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥