Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.37: गंधर्वपति! आपने विश्वा और अविश्व आदि कहकर यह प्रश्नावली प्रस्तुत की है। विश्वा अव्यक्त प्रकृति का नाम है। चूँकि यह इस संसार में बाँधने वाली है, इसलिए यह भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में भयंकर है - इस बात को आपको अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंधर्वपति! आपने विश्वा और अविश्व आदि कहकर यह प्रश्नावली प्रस्तुत की है। विश्वा अव्यक्त प्रकृति का नाम है। चूँकि यह इस संसार में बाँधने वाली है, इसलिए यह भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में भयंकर है - इस बात को आपको अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
Gandharvapati! You have presented this questionnaire by saying Vishwa and Avishva etc. Vishwa is the name of unmanifested nature. Because it binds one in this world, it is dreadful in all the three times - past, present and future - you should understand this thing very well.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥