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mahabharat 12.318.36: राजन! उस समय मैंने राजा विश्वावसु से कहा - 'गन्धर्वराज! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उनका उत्तर सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.318.36 
अथोक्तस्तु मया राजन् राजा विश्वावसुस्तदा।
श्रूयतां यद् भवानस्मान् प्रश्नं सम्पृष्टवानिह॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय मैंने राजा विश्वावसु से कहा - 'गन्धर्वराज! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उनका उत्तर सुनिए।
 
King! At that time I said to King Visvavasu - 'Gandharvaraj! Listen to the answers to the questions you have asked me here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)