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mahabharat 12.318.30: 18. हे राजन! वेद क्या है? 19. अवेद क्या है? 20. जंगम क्या है? 21. स्थावर क्या है? 22. अद्वितीय क्या है? 23. अविनाशी क्या है? 24. और नाशवान क्या है? ये उनके उत्तम प्रश्न हैं। 30.   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.318.30 
वेद्यावेद्यं तथा राजन्नचलं चलमेव च।
अपूर्वमक्षयं क्षय्यमेतत् प्रश्नमनुत्तमम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
18. हे राजन! वेद क्या है? 19. अवेद क्या है? 20. जंगम क्या है? 21. स्थावर क्या है? 22. अद्वितीय क्या है? 23. अविनाशी क्या है? 24. और नाशवान क्या है? ये उनके उत्तम प्रश्न हैं। 30.
 
18. O King! What is Veda? 19. What is non-veda? 20. What is movable? 21. What is immovable? 22. What is unique? 23. What is imperishable? 24. And what is destructible? These are their best questions. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)