Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.29: 7. ज्ञान क्या है ? 8. ज्ञेय क्या है ? 9. ज्ञाता क्या है ? 10. अज्ञानी क्या है ? 11. के कौन है ? 12. तपस्वी कौन है ? 13. और तपस्वी कौन है ? 14. सूर्य कौन है ? 15. और अतिसूर्य कौन है ? 16. और ज्ञान क्या है ? 17. और अज्ञान क्या है ?॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञानं ज्ञेयं तथा ज्ञोऽज्ञ: कस्तपा अतपास्तथा।
सूर्याति सूर्य इति च विद्याविद्ये तथैव च॥ २९॥
अनुवाद
7. ज्ञान क्या है ? 8. ज्ञेय क्या है ? 9. ज्ञाता क्या है ? 10. अज्ञानी क्या है ? 11. के कौन है ? 12. तपस्वी कौन है ? 13. और तपस्वी कौन है ? 14. सूर्य कौन है ? 15. और अतिसूर्य कौन है ? 16. और ज्ञान क्या है ? 17. और अज्ञान क्या है ?॥29॥
7. What is knowledge? 8. What is the knowable? 9. What is the knower? 10. What is the ignorant? 11. Who is K? 12. Who is an ascetic? 13. And who is an ascetic? 14. Who is the Sun? 15. And who is the Atisurya? 16. And what is knowledge? 17. And what is ignorance?॥29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥