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mahabharat 12.318.27-28: पृथ्वीनाथ! इसके बाद उन्होंने वेद-संबंधी चौबीस प्रश्न पूछे। फिर उन्होंने आन्विकी विद्या से संबंधित पच्चीसवाँ प्रश्न प्रस्तुत किया। वे चौबीस प्रश्न इस प्रकार हैं- 1. विश्व क्या है? 2. अविश्व क्या है? 3. अश्व क्या है? 4. अश्व क्या है? 5. मित्र क्या है? 6. वरुण क्या है?॥27-28॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  12.318.27-28 
चतुर्विंशांस्ततोऽपृच्छत् प्रश्नान् वेदस्य पार्थिव॥ २७॥
पञ्चविंशतिमं प्रश्नं पप्रच्छान्वीक्षिकीं तदा।
विश्वाविश्वं तथाश्वाश्वं मित्रं वरुणमेव च॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! इसके बाद उन्होंने वेद-संबंधी चौबीस प्रश्न पूछे। फिर उन्होंने आन्विकी विद्या से संबंधित पच्चीसवाँ प्रश्न प्रस्तुत किया। वे चौबीस प्रश्न इस प्रकार हैं- 1. विश्व क्या है? 2. अविश्व क्या है? 3. अश्व क्या है? 4. अश्व क्या है? 5. मित्र क्या है? 6. वरुण क्या है?॥27-28॥
 
Prithvinath! After that he asked twenty four questions related to Vedas. Then he presented the twenty fifth question related to Anviksiki Vidya. Those twenty four questions are as follows- 1. What is Vishwa? 2. What is Avishva? 3. What is Ashwa? 4. What is Ashwa? 5. What is Mitra? 6. What is Varun?॥27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)