Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.318.25: इस प्रकार सूर्यदेव द्वारा उपदेशित शुक्ल यजुर्वेद की पंद्रह शाखाओं का ज्ञान प्राप्त करके मैंने अपनी इच्छानुसार वेद के सिद्धांतों का चिंतन किया है॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.318.25 
शाखा: पञ्चदशेमास्तु विद्या भास्करदेशिता:।
प्रतिष्ठाप्य यथाकामं वेद्यं तदनुचिन्तयम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सूर्यदेव द्वारा उपदेशित शुक्ल यजुर्वेद की पंद्रह शाखाओं का ज्ञान प्राप्त करके मैंने अपनी इच्छानुसार वेद के सिद्धांतों का चिंतन किया है॥ 25॥
 
Thus, having acquired the knowledge of the fifteen branches of the Shukla Yajurveda taught by the Sun God, I have contemplated upon the principles of Veda as per my wish.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)