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mahabharat 12.318.24: फिर मैंने शिष्यों को रहस्य और संग्रहसहित सम्पूर्ण ग्रन्थ पढ़ाया और उन्हें घर जाने की अनुमति दी। फिर वे सब शिष्य शुद्ध आचरण और विचारों से युक्त होकर अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने-अपने घर चले गए॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.318.24 
शिष्याणामखिलं कृत्स्नमनुज्ञातं ससंग्रहम्।
सर्वे च शिष्या: शुचयो गता: परमहर्षिता:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने शिष्यों को रहस्य और संग्रहसहित सम्पूर्ण ग्रन्थ पढ़ाया और उन्हें घर जाने की अनुमति दी। फिर वे सब शिष्य शुद्ध आचरण और विचारों से युक्त होकर अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने-अपने घर चले गए॥ 24॥
 
Then I taught the entire book to the disciples including its secrets and collections and allowed them to go home. Then all those disciples with pure conduct and thoughts went to their respective homes very happy.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)