Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.22-23: नरेश्वर! तत्पश्चात् भगवान सूर्य की कृपा से मैंने बीजरूप प्रणव और देवी सरस्वती को प्रस्तुत करके शतपथ की रचना आरम्भ की और इस अद्वितीय ग्रन्थ को पूर्ण किया तथा उसका भलीभाँति संपादन भी किया, जो मेरे अभीष्ट मोक्षमार्ग का ही था। 22-23॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! तत्पश्चात् भगवान सूर्य की कृपा से मैंने बीजरूप प्रणव और देवी सरस्वती को प्रस्तुत करके शतपथ की रचना आरम्भ की और इस अद्वितीय ग्रन्थ को पूर्ण किया तथा उसका भलीभाँति संपादन भी किया, जो मेरे अभीष्ट मोक्षमार्ग का ही था। 22-23॥
Nareshwar! Thereafter, by the grace of Lord Surya, I started the composition of Shatapath by presenting the seed form Pranav and Goddess Saraswati and completed this unique book and also edited it well which was the path of salvation that I desired. 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥