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mahabharat 12.318.20: तत्पश्चात् सुमन्तु, पैल, जैमिनी, तुम्हारे पिता तथा अन्य ऋषियों ने मेरा बड़ा आदर-सत्कार किया॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.318.20 
सुमन्तुनाथ पैलेन तथा जैमिनिना च वै।
पित्रा ते मुनिभिश्चैव ततोऽहमनुमानित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुमन्तु, पैल, जैमिनी, तुम्हारे पिता तथा अन्य ऋषियों ने मेरा बड़ा आदर-सत्कार किया॥20॥
 
Thereafter Sumantu, Pail, Jaimini, your father and other sages honored me with great respect. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)