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mahabharat 12.318.16: उस समय मैंने बड़े हर्ष के साथ रहस्य, संग्रह और परिशिष्ट भागों सहित सम्पूर्ण शतपथ का संकलन किया॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.318.16 
तत: शतपथं कृत्स्नं सरहस्यं ससंग्रहम्।
चक्रे सपरिशेषं च हर्षेण परमेण ह॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस समय मैंने बड़े हर्ष के साथ रहस्य, संग्रह और परिशिष्ट भागों सहित सम्पूर्ण शतपथ का संकलन किया॥16॥
 
At that time, with great joy I compiled the entire Shatapatha including the secrets, collections and appendix parts.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)