Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.111: अतः तुम प्रकृति से परे, महत्, पवित्र, शुभ, शुद्ध, निर्मल और मोक्षस्वरूप ब्रह्म की आराधना करो। पृथ्वीनाथ! क्षेत्र को जानकर और ज्ञानयज्ञ का आश्रय लेकर तुम निश्चय ही ज्ञानी मुनि बनोगे। 111॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः तुम प्रकृति से परे, महत्, पवित्र, शुभ, शुद्ध, निर्मल और मोक्षस्वरूप ब्रह्म की आराधना करो। पृथ्वीनाथ! क्षेत्र को जानकर और ज्ञानयज्ञ का आश्रय लेकर तुम निश्चय ही ज्ञानी मुनि बनोगे। 111॥
Therefore, you should worship Brahma who is beyond nature, important, sacred, auspicious, pure, pure and the embodiment of salvation. Prithvinath! By knowing the area and taking shelter of Gyan Yagya, you will definitely become a wise sage. 111॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥