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mahabharat 12.318.110: राजन! ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि देह-जन्म-मृत्यु को पार करना अत्यन्त कठिन है। यज्ञ आदि करके भी मनुष्य उस कठिन संकट को पार नहीं कर सकता। यज्ञ, तप, नियम और व्रत करने से मनुष्य स्वर्ग को जाते हैं और जब उनके पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तब वे पुनः इस पृथ्वी पर गिरते हैं॥110॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  12.318.110 
दुर्गं जन्म निधनं चापि राजन्
न भौतिकं ज्ञानविदो वदन्ति।
यज्ञैस्तपोभिर्नियमैर्व्रतैश्च
दिवं समासाद्य पतन्ति भूमौ॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
राजन! ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि देह-जन्म-मृत्यु को पार करना अत्यन्त कठिन है। यज्ञ आदि करके भी मनुष्य उस कठिन संकट को पार नहीं कर सकता। यज्ञ, तप, नियम और व्रत करने से मनुष्य स्वर्ग को जाते हैं और जब उनके पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तब वे पुनः इस पृथ्वी पर गिरते हैं॥110॥
 
King! The wise men say that it is very difficult to cross the physical birth and death. Even by performing yajnas etc. man cannot cross that difficult crisis. By performing yajnas, penance, rules and fasts people go to heaven and when their virtues get exhausted they again fall on this earth.॥110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)