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mahabharat 12.318.11: द्विजश्रेष्ठ! तुम सम्पूर्ण शतपथ का भी संपादन करोगे। इसके बाद तुम्हारी बुद्धि मोक्ष में स्थिर हो जाएगी।' 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.318.11 
कृत्स्नं शतपथं चैव प्रणेष्यसि द्विजर्षभ।
तस्यान्ते चापुनर्भावे बुद्धिस्तव भविष्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! तुम सम्पूर्ण शतपथ का भी संपादन करोगे। इसके बाद तुम्हारी बुद्धि मोक्ष में स्थिर हो जाएगी।' 11॥
 
‘Dwijashrestha! You will also edit the entire Shatapatha. After this your intellect will be stable in salvation. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)