Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.107: जो महत्तत्त्व की उपासना करते हैं, वे महत्तत्त्व को प्राप्त करते हैं और जो अहंकार की उपासना करते हैं, वे अहंकार को प्राप्त करते हैं; परंतु महत्तत्त्व और अहंकार से श्रेष्ठ जो स्थान हैं, उन्हें प्राप्त करना चाहिए ॥107॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो महत्तत्त्व की उपासना करते हैं, वे महत्तत्त्व को प्राप्त करते हैं और जो अहंकार की उपासना करते हैं, वे अहंकार को प्राप्त करते हैं; परंतु महत्तत्त्व और अहंकार से श्रेष्ठ जो स्थान हैं, उन्हें प्राप्त करना चाहिए ॥107॥
Those who worship the Mahatattva attain the Mahatattva and those who worship the ego attain the ego; But the places which are better than importance and ego should be achieved. 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥