Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.105: जिसने अव्यक्त प्रकृति का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है और सगुण तथा निर्गुण ईश्वर को नहीं पहचाना है, उस विद्वान को तीर्थस्थानों में जाकर यज्ञ करना चाहिए ॥105॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिसने अव्यक्त प्रकृति का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है और सगुण तथा निर्गुण ईश्वर को नहीं पहचाना है, उस विद्वान को तीर्थस्थानों में जाकर यज्ञ करना चाहिए ॥105॥
One who has not gained knowledge of the unmanifested nature and has not identified the Saguna and Nirguna God, that scholar should visit pilgrimage sites and perform yagyas. 105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥