Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.102-103: विद्वान पुरुष कहते हैं कि ब्रह्म सनातन और शुद्ध है; अतः तुम भी उसे जानकर शुद्ध हो जाओ। हे पुरुषश्रेष्ठ! जो कुछ दिया जाता है, जो कुछ किसी को प्राप्त होता है, दान का अनुमोदन करनेवाला, देनेवाला और दान को ग्रहण करनेवाला, वह सब अव्यक्त परमात्मा ही है। परमात्मा ही यह सब देता और लेता है॥102-103॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विद्वान पुरुष कहते हैं कि ब्रह्म सनातन और शुद्ध है; अतः तुम भी उसे जानकर शुद्ध हो जाओ। हे पुरुषश्रेष्ठ! जो कुछ दिया जाता है, जो कुछ किसी को प्राप्त होता है, दान का अनुमोदन करनेवाला, देनेवाला और दान को ग्रहण करनेवाला, वह सब अव्यक्त परमात्मा ही है। परमात्मा ही यह सब देता और लेता है॥102-103॥
Learned men say that the Brahma is eternal and pure; hence you too become pure by knowing about Him. O best of men! Whatever is given, whatever is received by someone, the one who approves of the donation, the one who gives and the one who accepts that donation, all of that is the unmanifested Supreme Soul. The Supreme Soul gives and takes all this.॥102-103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥