Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.318.101: युधिष्ठिर! सांख्य और योग के विद्वान् लोग अपने शास्त्रों में वर्णित लक्षणों के अनुसार देखते और समझते हैं कि ब्रह्म कामनाओं और वासनाओं से रहित है, स्थिर है और वही परब्रह्म है ॥101॥ | mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्यन्ति योगा: सांख्याश्च स्वशास्त्रकृतलक्षणा:।
इष्टानिष्टविमुक्तं हि तस्थौ ब्रह्म परात्परम्॥ १०१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! सांख्य और योग के विद्वान् लोग अपने शास्त्रों में वर्णित लक्षणों के अनुसार देखते और समझते हैं कि ब्रह्म कामनाओं और वासनाओं से रहित है, स्थिर है और वही परब्रह्म है ॥101॥
Yudhishthira! The scholars of Sankhya and Yoga see and understand, as per the characteristics described in their scriptures, that the Brahma is free from desires and desires, is stable and is the Supreme Being. ॥101॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥