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mahabharat 12.318.10: जब मैं पूर्णतः शांत हो गया, तब भगवान भास्कर ने मेरी ओर देखकर कहा - 'हे ब्राह्मण! खील और उपनिषदों सहित समस्त वेद तुम्हारे भीतर स्थापित हो जायेंगे।॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 318: याज्ञवल्क्यद्वारा अपनेको सूर्यसे वेदज्ञानकी प्राप्तिका प्रसंग सुनाना, विश्वावसुको जीवात्मा और परमात्माकी एकताके ज्ञानका उपदेश देकर उसका फलमुक्ति बताना तथा जनकको उपदेश देकर विदा होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.318.10 
शीतीभूतं च मां दृष्ट्वा भगवानाह भास्कर:।
प्रतिष्ठास्यति ते वेद: सखिल: सोत्तरो द्विज॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब मैं पूर्णतः शांत हो गया, तब भगवान भास्कर ने मेरी ओर देखकर कहा - 'हे ब्राह्मण! खील और उपनिषदों सहित समस्त वेद तुम्हारे भीतर स्थापित हो जायेंगे।॥ 10॥
 
When I became completely cool, then looking at me Lord Bhaskar said - 'O Brahmin! All the Vedas including the Khila and Upanishads will be established within you.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)